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ऐतिहासिक स्थल

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एतिहासिक स्थल

बूंदी रो किलो (तारागढ)
इतिहास
मेवाड रा राणा लाखा कसम खाई की अमुक तिथी तक अगर बे इ किले ने ना जितेगा तो बे अन्न जल नही ग्रहण करेगा। पण जद किलो हासिल ना हुयो तो बे मिट्टी रो किलो बणवार बिने जीतणे री कोशिश करी इयारी सेना मे सामिल एक हाडा लडाके ने इ दुर्ग री रक्षा रो प्रयास करियो। ओ छदम युद्ध वास्तविक युद्ध मे बदल गियो औंर लडाके री मोत हुयगी। महमुद खिलजी औंर राणा कुम्भा भी क ई बार बूंदी ने जीत लिया। जयपुर नरेश सवाई जय सिंह इण पर आक्रमण कर बहनोई बुद्ध सिंह हाडा ने हटा र दलेल सिंह ने अधिपति बणायो ।
ओ किलो आप रे जीवन्त भित्ति चित्रो रे वास्ते भी जाणो जावे हैं। खासकर राव उम्मेदसिंह रे समय बणियोडी चित्रशाला बूंदी चित्र शैंली रो उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

बनावट
अरावली पर्वत श्रंृखला मे स्थित ओ किलो हाडा राजपूतो री वीरता रो प्रतीक हैं। बम्बादेव रा हाडा शासक देव सिंह बूंदी रा मुखिया जैंतामीणा ने हरा र बूंदी ने जीत लिया, बाद मे इया रा वंशज राव बर सिंह ई दुर्ग रो निर्माण करवायो।करीब 1,426 फ़ीट ऊंची पर्वत री चोटी पर स्थित होणे कारण ई किले ने तारागढ नाम भी देईजो।कर्नल टाड इ किले री स्थापत्य कला सु प्रभावित हो इने राजस्थान रो सर्वश्रेष्ठ किलो बतायो। तारागढ पर हाडा वंश रा राजा कदी भी एक छत्र राज ना कर सकिया । आपरी सामरिक स्थिती रे कारण ओ किलो आक्रान्ताओ री लिप्सा रो कारण रहयो।
जैंसलमेर दुर्गÔ
जैंसलमेर दुर्ग भारत री उत्तरी सीमा रे प्रहरी रे रूप मे खडो हैं। हैं।ओ दुर्ग भाटी राजपूतो री वीर भूमि रे रूप मे प्रसिद्ध हैं इण वास्ते ओ दोहो प्रचलित हैं।
गढ दिल्ली,गढ आगरो,अधगढ बीकानेर।
भलो चिणायो भाटियां,सिरैं तो जैंसलमेर।।
इतिहास
सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिलजी किले पर आक्रमण कर 8 साल तक डेरो डालियो।फ़िरोजशाह तुगलक रे समय दुसरो युद्ध हुयो जिण मे कई भाटी सरदार शहीद हुया औंर वीरांगनाया जौहर करियो।तीसरे युद्ध मे भाटी राजपूत वीर गति पाई पण रानियां जौहर कोनी करियो।ओ युद्ध शरणागत अमीर अली द्वारा रावल लूणकरण रे साथे धोखाधडी रे कारण हुयो।
बनावट
इ दुर्ग ने रावल जैसल 1115 ई. मे बणवायो।ओ किलो 7 साल मे पूरो हुयो।जैंसलमेर दुर्ग त्रिकुटाकृ ति रो हैं जिण मे 99 बुर्जा हैं। इ दुर्ग ने पीले रंग रे पत्थरो पर पत्थरो ने राख र विशेष मसाले सु जोड र बणायो गियो हैं।पीले रंग रे पत्थरो रे उपयोग रे कारण धूप मे ओ किलो सोने रे समान चमके, जिका सु इने सोनगढ भी केविजे हैं।ओ दुर्ग 250 फ़ीट ऊंचो हैं जिण मे दोहरा परकोटा हैं।इण मे प्रवेश द्वार अक्षय पोल हैं जिके रे साथे सूरज पोल,गणेश पोल,औंर हवा पोल भी हैं।इण रो रंग महल औंर मोती महल जालियो झरोखो औंर आर्कषक चित्रकारी रे कारण दर्शनीय हैं। जैंसलमेर दुर्ग मे जैंन मंदिर ,बादल महल ,गज विलास,जवाहर विलास महल ,पार्शवनाथ मंदिर ,लक्ष्मी नारायण मंदिरऔंर ऋ षभदेव मंदिर भी वणियोडा हैं। किले मे ह्स्त लिखित ग्रन्थो रो सबसु बडो भंडार हैं।
जयगढ दुर्ग
इतिहास
मिर्जा जयसिंह द्वारा इण दुर्ग रो निर्माण हुयो हो। विशिष्ट केदीयो री जेल रे  रूप मे इ दुर्ग रो उपयोग हुवतो हो। सवाई जय सिंह आप रे छोटे भाई विजय सिंह ने अठे ही केद करियो हो औंर अठे ही विणरी मृत्यु होइ।अठे बाट औंर तराजू भी मिले हैं, जिका शायद बारूद तोलने रे काम आवता हा। इ गढ रो उपयोग धन ने सुरक्षित राखण वास्ते करिजे हो।मान्यता हैं कि काबूल,कंधार ने जीतणे बाद लायोडो धन अठे ही राखियोडो हो। 
पूरे भारत मे ओ ही एक दुर्ग हो जिके मे तोप ढालने रो कारखानो हो।जय बाण तोप एशिया री सब सु बडी तोप हैं। इण तोप मे एक बार मे 100 किलो बारुद भरिजे हैं।तोप रो वजन 50 ट्न हैं। परीक्षण रे तौंर सु इने एक बार ही चलायो गयो ।

बनावट
इण दुर्ग रो विस्तार करीब 4 किमी री परिधि मे हैं।इण रा मुख्य दरवाजा डूृंगर ,दरवाजा ,अविन दरवाजा ,औंर भैंरु दरवाजा हैं। इण मे डूंगर नाहर गढ री ओर अवनि आम्बेर  राज प्रसाद री औंर दुर्ग दरवाजा साग़र जलाशय री ओर निकले हैं।दुर्ग मे सुरंग भी हैं।अठे जलेब चौंक ,खिलवत निवास,ललित मन्दिर,विलास मन्दिर,सूर्य मन्दिर,राणावत जी रो चौंक दर्शनीय हैं।अठे रे लक्ष्मी औंर विलास मन्दिर री जालियो मे बारीक कारीगरी करियोडी हैं।अठे काल भैंरव मन्दिर हैं।मनोरंजन वासते कठ पुतली उधान भी हैं।जय गढ रे भीतर एक अन्तःदुर्ग भी हैं।जिकेमे शास्त्रो रो विशाल सग्रंह हैं। जय बाण रे अलावा अठे ओर भी 9 तोपा राखियोडी हैं।ईण रे अलावा कई तरह री तलवारा,लम्बी राइफ़ला,बन्दूका,भाला,शाही नगाडा,घडा,विशाल कलश,आदि चीजा देखण वालो रो मन मोह लेवे हैं।
नागौंर दुर्ग
मारवाड रा दूसरा दुर्ग पहाडा ऊपर बणियोडा हैं पण नागौंर दुर्ग जमीन ऊपर बणियोडो हैं। बीच मे स्थित होणे कारण ईण पर निरंतर हमला होवता हा। नागौंर ने जांगल जनपद री राजधानी मानिजे हो। अठे नागवंशिय क्षत्रिय दो हजार साल तक शासन करियो। इरे निर्माण री एक विशे षता हैं कि बार सु छोडोडा तोप रा गोला प्राचीर ने पार कर किले रे महल ने कोई नुकसाण नहीं पहुँचा सके।जबकि महल प्राचीर सु ऊपर उठयोडो हैं।
बनावट
नागौंर दुर्ग वास्तुशास्त्र रे नियमो रे मुताबिक वणियोडो हैं। इणरे चारो औंर गहरी खाई खोदीयोडी हैं। इणरो परकोटो 5 हजार फ़ीट लम्बो हैं। इण प्राचीर मे 28 बुर्जा औंर दोहरा परकोटा हैं।ओ दुर्ग चारो औंर सु रेत रे धोरो सु घिरयोडो हैं। नागौंर दुर्ग रो मुख्य द्वार बडो भव्य हैं। इ द्वार पर विशाल लोहे री सींंखचो वालो फ़ाट्क लागियोडो हैं।दरवाजो रे दोनो ओर विशाल बुर्ज औंर धनुषाकार भाग ऊपर 3 द्वार वालो झरोखा वणियोडा हैं।अठे सु आगे किले रो दूसरो विशाल दरवाजो हैं। बिरे बाद 60 डिग्री रो कोण बणतो तीसरो विशाल दरवाजो हैं। इ दो दरवाजो रे बीच रे भाग ने धूधस केविजे हैं।किले रो परकोटो दोहरो वणियोडो हैं।तीसरे परकोटो ने पार करने पर किले रो अन्तःभाग आ जावे हैं। किले रे 6 दरवाजा हैं । जिका सिराइ पोल , कचहरी पोल, सूरज पोल,घूषी पोल औंर राज पोल रे नाम सु जाणा जावे हैं। किले रे दक्षिण भाग मे एक मस्जिद हैं। इ मस्जिद ने शाँहजहा बणवाया था।
इतिहास
केन्द्रीय स्थल पर होणे कारण ई दुर्ग ने बार बार मुगलो रे आक्रमण रो शिकार होणो पडियो । महाराणा कुंभा भी दो बार नागौंर पर आक्रमण करियो। जिकामे बे सफ़ल हुया ।मारवाड रा शासक बख्त सिंह रे समय इ दुर्ग रो पुर्ननिर्माण करवायो गयो । ए किले री सुरक्षा व्यवस्था ने मजबूत करिया। मराठा भी इ दुर्ग ऊपर आक्रमण करियो। महाराणा विजय सिंह ने भी मराठो रे हमलो सु बचणे वास्ते कई महीनो तक दुर्ग मे रेवणो पडियो।ओ दुर्ग पांचाल नरेश द्रुपद रे आधिपत्य मे हो जिके ने अर्जुन जीतणे बाद द्रोणाचार्य ने सौंंप दियो हो।


प्रसिद्ध छतरीस्थान
8 खंभा री छतरीबाडोली
32 खंभा री छतरीरणथम्भौर
80 खंभा री छतरीअलवर
क्षारबाग री छतरियाँँकोटा अर बूंदी
बडा बाग री छतरीजैसलमेर
राव बीकाजी अर रायसिंह री छतरियाँँदेवकुंड (बीकानेर)
राठौड राजाओं री छतरियाँँमंडोर (जोधपुर)
राजा बख्तावर सिंह री छतरीअलवर
कछवाहा शासका री छतरियाँँगटोर (नाहरगढ, जयपुर)
राजा जोधसिंह री छतरीबदनौर
सिसोदिया वंश रे राजाओ री छतरियाँँआहड (उदयपुर)
रैदास री छतरियाँँचित्तौडगढ़
गोपालसिंह री छतरीकरौली
मानसिंह प्रथम री छतरीआमेर

जैसलमेर - पटवा री हवेली, सालिम सिंह जी री हवेली, नथमल जी री हवेली।

बीकानेर - बछावता री हवेली।

जोधपुर - बडे मिया री हवेली, पोकरण री हवेली, पाल हवेली, राखी हवेली।

टोंक - सुनहरी हवेली।

कोटा - बडे देवता री हवेली।

उदयपुर - बागोर हवेली।

झुंझुनूं - टीबडेवाला री हवेली, ईसरदास मोदी री हवेली।

नवलगढ - शेखावटी री स्वर्ण नगरी, पौद्दार हवेली, भगेरिया री हवेलियाँ, भगता री हवेली।

बिसाऊ(झुंझुनूं)- नाथूराम पोद्दार री हवेली, सेठ हीराराम-बनारसी लाल री हवेली, सेठ जयदयाल केडिया री पुराणी हवेली, सीताराम सिगतिया री हवेली।

मण्डावा(झुंझुनूं)- सागरमल लाडिया, रामदेव चौखाणी, रामनाथ गोयनका री हवेलियाँ।

महनसर(झुंझुनूं)- सोने चाँदी री हवेली।

श्रीमाधोपुर(सीकर)- पंसारी री हवेली।

लक्ष्मणगढ(सीकर)- केडिया री हवेली, राठी री हवेली।

चुरू - सुराणों रा हवामहल, रामविलास गोयनका री हवेली, मंत्रियां री मोटी हवेली।

स्वतंत्रता संग्राम

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स्वतंत्रता संग्राम

राजस्थान रे इलाका मांय 19वीं शताब्दी में ईस्ट इण्डिया कम्पनी रो राजनीतिक प्रभुत्व होणे रे कारण युद्ध अर अशान्ति रो वातावरण तो खतम हो चुक्यो हो, पण अटे रे लोगा ने इण वास्ते भारी कीमत चुकाणी पडी ही। राजस्थान री आन्तरिक अर विदेश नीति पर अंग्रेजा रो पूरो अधिकार हुयग्यो हो अर राजा लोग इयारे हाथ री कठपुतली बण गिया हा। ऐडी स्थिति मांय राजस्थान री जनता में भारत रे दूजा प्रान्ता अर राज्या रे समान विद्रोह री ज्वाला सुलगण लागी, अर 1857 रे पेले स्वाधीनता संग्राम में राजस्थान भी विद्रोह री ज्वाला सु अछूतो नीं रह्यो।
राजस्थान मांय 1857 रो स्वाधीनता संग्राम
नसीराबाद
सबसु पेला नसीराबाद में इण विद्रोह री शुरू आत हुई। इणरे पीछे मुख्य कारण यो हो कि ब्रिटिश सरकार अजमेर री 15वीं बंग़ाल इन्फ़ेन्ट्री ने नसीराबाद भेज दियो क्युकि सरकार ने इण पर विश्‍वास नीं हो। सरकार रे इण निर्णय सु सब सैनिक नाराज हुयग्या अर बे ब्रिटिश सरकार के खिलाफ़ क्रांति रो आगाज कर दियो। इणरे अलावा ब्रिटिश सरकार बम्बई रे सैनिका ने नसीराबाद में बुलवाया अर पूरी सेना री जंाच पड़ताल करणे वास्ते कह्यो। ब्रिटिश सरकार नसीराबाद में कई तोपा तैयार करवाई। इणसु भी नसीराबाद रा सैनिक नाराज हुयग्या अर बे विद्रोह कर दियो। सेनाकई ब्रितानिया ने मौत रे घाट उतार दियो अर साथे साथे वियारी सम्पत्ति भी नष्ट कर दी। इण सैनिकां रे साथे दूजा लोग भी शामल हुयग्या।
नीमच
नसीराबाद री घटना री खबर मिलते ही 3 जून 1857 ने नीमच रा विद्रोही कई ब्रितानिया नेे मौत रे घाट उतार दियो फ़लस्वरू प ब्रितानी भी बदलो लेणेे री योजना बणाई। बे 7 जून ने नीमच पर आपरो अधिकार कर लियो। बाद में विद्रोही राजस्थान रे दूसरे इलाका री तरफ़ बढ़ने लाग्या।
जोधपुर
अटे रा कई लोग राजा तख्त सिंह रे शासन सु नाराज हा। जिके कारण एक दिन अटे रा सैनिक इयारे खिलाफ़ विद्रोह कर दियो। इयारे साथे आउवा रा ब्रिटिश विरोधी कुशाल सिंह भी हा।
कुशाल सिंह रो सामनो करणे रे वास्ते लेफ़्टिनेंट हीथकोट रे साथे जोधपुर री सेना आई ही पण कुशाल सिंह इने परास्त कर दियो। बाद में ब्रितानी सेना आउवा रे किले पर आक्रमण करियो पण इने भी हार रो मुँह देखणो पडीयो लेकिन ब्रिगेडियर होम्स इ पराजय रो बदळो लेणो चावतो हो इण वास्ते बोे आउवा पर आक्रमण करियो अबे कुशाल सिंह किले ने छोड़ दियो अर सलुम्बर चला गिया। कुछ दिना बाद ब्रितानी आउवा पर अधिकार कर लियो अर अटे आतंक फ़ैलायो।
मेवाड़
मेवाड़ रा सामंत ब्रितानिया अर महाराणा सु नराज हा। इण सामन्ता में आपसी फ़ूट भी ही। महाराणा मेवाड़ रे सामन्ता ने ब्रितानिया री सहायता करणे री आज्ञा दी। इण टेम सलुम्बर रे रावत केसरी सिंह उदयपुर रे महाराणा ने चेतावनी दी कि यदि आठ दिन में बियारे परम्पराग़त अधिकार ने स्वीकार नीं करियो गयो तो बे बियारे प्रतिद्वंदी ने मेवाड़ रो शासक बणा देवेग़ा। सलुम्बर रे रावत केसरी सिंह आउवा रे ठाकुर कुशाल सिंह ने आपरे अटे शरण दी। इणी समय तांत्या टोपे राजपूताने री ओर कूच करियो। 1859 में नरवर रे मान सिंह इयारे साथे धोखो करियो अर इयाने गिरफ़्तार कर लियो। यद्यपि सामंत प्रत्यक्ष रू प सु ब्रिटिश सरकार रो विद्रोह नीं करियो पण विद्रोहिया ने शरण देर'र इण क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोटा
ब्रिटिश अधिकारी मेजर बर्टन कोटा रे महाराजा ने बतायो कि अटे रे दो चार ब्रिटिश विरोधी अधिकारिया ने ब्रिटिश सरकार ने सौंप देणो चाहिये। पण महाराजाइण काम में असमर्थता जताई तो ब्रितानी इण महाराजा पर आरोप लगायो कि बे विद्रोहिया सु मिलयोडा हैं। इण बात री खबर मिलते ही सैनिक मेजर बर्टन ने मार डालियो। विद्रोही राजा रे महल ने घेर लिया, तब राजा करौली रे शासक सु सैनिक सहायता मांगी। करौली रा शासकसहयोग करियो अर विद्रोहिया ने महल रे पीछे खदेडीया। इणी समय जनरल एच.जी.राबर्टस आपरी सेना रे साथे चम्बल नदी रे किनारे पहुंच्या। इयाने देख'र विद्रोही कोटा सु भाग गिया।
राज्य रे दूजा क्षेत्रा में विद्रोह
इण विद्रोह में अलवर रे कई नेता हिस्सो लिदो। जयपुर में उस्मान खां अर सादुल्ला खांविद्रोह कर दियो। टोंक में सैनिकाविद्रोह कर दीयो अर नीमच विद्रोहिया ने टोंक आणे रो निमंत्रण दियो। ए टोंक रे नवाब रे घेरो डाल'र बियासु बकाया वेतन वसूल करियो। इणी तरह बीकानेर रा शासक नाना साहब ने सहायता रो आश्‍वासन दियो हो अर तांत्या टोपे जी री मदद रे वास्ते द्स हजार घुड़सवार सैनिक भेजिया। हालांकि राजस्थान रा अधिकांश शासक पूरे विद्रोह काल में ब्रितानिया रे प्रति वफ़ादार रहिया, फेर भी विद्रोहिया रे दबाव रे कारण बियाने यत्र-तत्र विद्रोहिया रोे समर्थन प्रदान करणो पडीयो।
राजस्थान में विद्रोह रो घटनाक्रम
विद्रोह रो स्थानविद्रोहरीतारीख
नसीराबाद28 मई 1857
नीमच3 जून 1857
एरिनपुरा21 अगस्त 1857
आउवाअगस्त 1857
देवली छावनीजून 1857
भरतपुर31 मई 1857
अलवर11 जूलाई 1857
धौलपुरअक्टूबर 1857
टोंकजून 1857
कोटा15 अक्टूबर 1857
अजमेर री केंद्रीय जेल9 अगस्त 1857
जोधपुर लीजियन8 सितम्बर 1857


क्र.स.स्वतंत्रतासेनानीगांव / क्षेत्रजिलो
1श्री अर्जुन लाल सेठी-जयपुर
2श्री केसरी सिंह बारहठ-उदयपुर
3श्री जमना लाल बजाज-सीकर
4श्री लादू राम जोशीमूंडवाड़ासीकर
5श्री नेतराम सिंहग़ोरीरझुन्झुनंू
6सरदार श्री हरपाल सिंहह्नुमान पुराझुन्झुनंू
7श्री घासीराम चोधरीबासडीझुन्झुनंू
8श्री हीरालाल शास्त्रीजोबनेरजयपुर
9बाबा श्री हरीशचन्द्र शास्त्री-जयपुर
10श्री राम नारायण चौधरीनीम का थाना-
11श्री नरोतम लाल जोशी-झुन्झुनूं
12श्रीमती दुर्गा देवीचेचेरीझुन्झुनूं
13श्री मोती लाल तेजावतझाड़ोलउदयपुर
14श्री जोरावर सिंह बारहठशाहपुराउदयपुर
15श्री प्रतापसिंह बारहठ-उदयपुर
16श्री मोहन लाल सुखाड़ियानाथद्वारा-
17श्री माणिक्य लाल वर्माबिजोलियाभीलवाड़ा
18श्री साधु सीताराम दासबिजोलियाभीलवाड़ा
19श्री बलवन्त सिंह मेहता-उदयपुर
20श्री दामोदर दास राठीपोकरण-
21श्री साग़रमल गोपा-जैसलमेर
22श्री छग़न राज चोपासनीवाला-जोधपुर
23श्री जयनारायण व्यास-जोधपुर
24श्री बालमुकुन्द बिस्सा-जोधपुर
25श्री मथुरादास माथुर-जोधपुर
26श्री नृसिंह कछवाहा-जोधपुर
27श्री ताड़केश्वर शर्मापंचेरीझुन्झुनूं
28श्री नानाभाई खाँट-डूँग़रपुर
29सुश्री कालीबाई भीलरास्तापालडूँग़रपुर
30श्री गोकुललाल असावादेवली
31श्री भोग़ीलाल पाण्डया-डूँग़रपुर
32श्री ऋषिद्त मेह्ताब्यावर-
33श्री ज्वाला प्रसाद शर्मा-अजमेर
34श्री गोपाल सिंहखरवाअजमेर
35श्री गोकुलभाई भट्टहाथलसिरोही
36श्री मास्टर आदित्येन्द्रथूननगरभरतपुर
37श्री रमेश स्वामीभुसावरभरतपुर
38श्री गोकुल वर्मा-भरतपुर
39श्री हरिदेव जोशीखान्दूबाँसवाड़ा
40श्रीमती नगेन्द्रवाला-कोटा
41पं श्री अभिन्न हरि-कोटा
42श्री विजय सिंह पथिकबुलन्दशहर-
43श्री हरिभाऊ उपाध्यायभौंरासाग्वालियर
44श्री नानक भील-बूँदी
45श्री बीरबल सिंहरायसिंह नगर-
46मास्टर श्री भोलानाथ-अलवर
47श्री जुगलकिशोर चतुर्वेदीसौंख (मथुरा)-
48श्री शोभाराम-अलवर
49श्री स्वामी कुमार नन्दरंगून (म्याम्यार)-
50बाबा श्री नरसिंहदासमद्रास-
51श्री देवी शंकर तिवाड़ीलखनऊ-

किला

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राजस्थान रा किला
क्र.स.किले रो नांवस्थान
1बूंदी रो किलो (तारागढ)बूंदी
2जैसलमेर रो किलोजैसलमेर
3जयगढ रो किलोजयगढ
4नागौर रो किलोनागौर


इतिहास 
मेवाड रा राणा लाखा कसम खाई की अमुक तिथी तक अगर बे इ किले ने ना जितेगा तो बे अन्न जल नही ग्रहण करेगा। पण जद किलो हासिल ना हुयो तो बे मिट्टी रो किलो बणवार बिने जीतणे री कोशिश करी इयारी सेना मे सामिल एक हाडा लडाके ने इ दुर्ग री रक्षा रो प्रयास करियो। ओ छदम युद्ध वास्तविक युद्ध मे बदल गियो औंर लडाके री मोत हुयगी। महमुद खिलजी औंर राणा कुम्भा भी क ई बार बूंदी ने जीत लिया। जयपुर नरेश सवाई जय सिंह इण पर आक्रमण कर बहनोई बुद्ध सिंह हाडा ने हटा र दलेल सिंह ने अधिपति बणायो ।
ओ किलो आप रे जीवन्त भित्ति चित्रो रे वास्ते भी जाणो जावे हैं। खासकर राव उम्मेदसिंह रे समय बणियोडी चित्रशाला बूंदी चित्र शैंली रो उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

बनावट 
अरावली पर्वत श्रंृखला मे स्थित ओ किलो हाडा राजपूतो री वीरता रो प्रतीक हैं। बम्बादेव रा हाडा शासक देव सिंह बूंदी रा मुखिया जैंतामीणा ने हरा र बूंदी ने जीत लिया, बाद मे इया रा वंशज राव बर सिंह ई दुर्ग रो निर्माण करवायो।करीब 1,426 फ़ीट ऊंची पर्वत री चोटी पर स्थित होणे कारण ई किले ने तारागढ नाम भी देईजो।कर्नल टाड इ किले री स्थापत्य कला सु प्रभावित हो इने राजस्थान रो सर्वश्रेष्ठ किलो बतायो। तारागढ पर हाडा वंश रा राजा कदी भी एक छत्र राज ना कर सकिया । आपरी सामरिक स्थिती रे कारण ओ किलो आक्रान्ताओ री लिप्सा रो कारण रहयो।



जैंसलमेर दुर्ग भारत री उत्तरी सीमा रे प्रहरी रे रूप मे खडो हैं। हैं।ओ दुर्ग भाटी राजपूतो री वीर भूमि रे रूप मे प्रसिद्ध हैं इण वास्ते ओ दोहो प्रचलित हैं।
गढ दिल्ली,गढ आगरो,अधगढ बीकानेर।
भलो चिणायो भाटियां,सिरैं तो जैंसलमेर।।

इतिहास 
सर्वप्रथम अलाउद्दीन खिलजी किले पर आक्रमण कर 8 साल तक डेरो डालियो।फ़िरोजशाह तुगलक रे समय दुसरो युद्ध हुयो जिण मे कई भाटी सरदार शहीद हुया औंर वीरांगनाया जौहर करियो।तीसरे युद्ध मे भाटी राजपूत वीर गति पाई पण रानियां जौहर कोनी करियो।ओ युद्ध शरणागत अमीर अली द्वारा रावल लूणकरण रे साथे धोखाधडी रे कारण हुयो।

बनावट
 दुर्ग ने रावल जैसल 1115 ई. मे बणवायो।ओ किलो 7 साल मे पूरो हुयो।जैंसलमेर दुर्ग त्रिकुटाकृ ति रो हैं जिण मे 99 बुर्जा हैं। इ दुर्ग ने पीले रंग रे पत्थरो पर पत्थरो ने राख र विशेष मसाले सु जोड र बणायो गियो हैं।पीले रंग रे पत्थरो रे उपयोग रे कारण धूप मे ओ किलो सोने रे समान चमके, जिका सु इने सोनगढ भी केविजे हैं।ओ दुर्ग 250 फ़ीट ऊंचो हैं जिण मे दोहरा परकोटा हैं।इण मे प्रवेश द्वार अक्षय पोल हैं जिके रे साथे सूरज पोल,गणेश पोल,औंर हवा पोल भी हैं।इण रो रंग महल औंर मोती महल जालियो झरोखो औंर आर्कषक चित्रकारी रे कारण दर्शनीय हैं। जैंसलमेर दुर्ग मे जैंन मंदिर ,बादल महल ,गज विलास,जवाहर विलास महल ,पार्शवनाथ मंदिर ,लक्ष्मी नारायण मंदिरऔंर ऋ षभदेव मंदिर भी वणियोडा हैं। किले मे ह्स्त लिखित ग्रन्थो रो सबसु बडो भंडार हैं।


इतिहास
मिर्जा जयसिंह द्वारा इण दुर्ग रो निर्माण हुयो हो। विशिष्ट केदीयो री जेल रे  रूप मे इ दुर्ग रो उपयोग हुवतो हो। सवाई जय सिंह आप रे छोटे भाई विजय सिंह ने अठे ही केद करियो हो औंर अठे ही विणरी मृत्यु होइ।अठे बाट औंर तराजू भी मिले हैं, जिका शायद बारूद तोलने रे काम आवता हा। इ गढ रो उपयोग धन ने सुरक्षित राखण वास्ते करिजे हो।मान्यता हैं कि काबूल,कंधार ने जीतणे बाद लायोडो धन अठे ही राखियोडो हो। 
पूरे भारत मे ओ ही एक दुर्ग हो जिके मे तोप ढालने रो कारखानो हो।जय बाण तोप एशिया री सब सु बडी तोप हैं। इण तोप मे एक बार मे 100 किलो बारुद भरिजे हैं।तोप रो वजन 50 ट्न हैं। परीक्षण रे तौंर सु इने एक बार ही चलायो गयो ।

बनावट
इण दुर्ग रो विस्तार करीब 4 किमी री परिधि मे हैं।इण रा मुख्य दरवाजा डूृंगर ,दरवाजा ,अविन दरवाजा ,औंर भैंरु दरवाजा हैं। इण मे डूंगर नाहर गढ री ओर अवनि आम्बेर  राज प्रसाद री औंर दुर्ग दरवाजा साग़र जलाशय री ओर निकले हैं।दुर्ग मे सुरंग भी हैं।अठे जलेब चौंक ,खिलवत निवास,ललित मन्दिर,विलास मन्दिर,सूर्य मन्दिर,राणावत जी रो चौंक दर्शनीय हैं।अठे रे लक्ष्मी औंर विलास मन्दिर री जालियो मे बारीक कारीगरी करियोडी हैं।अठे काल भैंरव मन्दिर हैं।मनोरंजन वासते कठ पुतली उधान भी हैं।जय गढ रे भीतर एक अन्तःदुर्ग भी हैं।जिकेमे शास्त्रो रो विशाल सग्रंह हैं। जय बाण रे अलावा अठे ओर भी 9 तोपा राखियोडी हैं।ईण रे अलावा कई तरह री तलवारा,लम्बी राइफ़ला,बन्दूका,भाला,शाही नगाडा,घडा,विशाल कलश,आदि चीजा देखण वालो रो मन मोह लेवे हैं।



मारवाड रा दूसरा दुर्ग पहाडा ऊपर बणियोडा हैं पण नागौंर दुर्ग जमीन ऊपर बणियोडो हैं। बीच मे स्थित होणे कारण ईण पर निरंतर हमला होवता हा। नागौंर ने जांगल जनपद री राजधानी मानिजे हो। अठे नागवंशिय क्षत्रिय दो हजार साल तक शासन करियो। इरे निर्माण री एक विशे षता हैं कि बार सु छोडोडा तोप रा गोला प्राचीर ने पार कर किले रे महल ने कोई नुकसाण नहीं पहुँचा सके।जबकि महल प्राचीर सु ऊपर उठयोडो हैं।
बनावट
नागौंर दुर्ग वास्तुशास्त्र रे नियमो रे मुताबिक वणियोडो हैं। इणरे चारो औंर गहरी खाई खोदीयोडी हैं। इणरो परकोटो 5 हजार फ़ीट लम्बो हैं। इण प्राचीर मे 28 बुर्जा औंर दोहरा परकोटा हैं।ओ दुर्ग चारो औंर सु रेत रे धोरो सु घिरयोडो हैं। नागौंर दुर्ग रो मुख्य द्वार बडो भव्य हैं। इ द्वार पर विशाल लोहे री सींंखचो वालो फ़ाट्क लागियोडो हैं।दरवाजो रे दोनो ओर विशाल बुर्ज औंर धनुषाकार भाग ऊपर 3 द्वार वालो झरोखा वणियोडा हैं।अठे सु आगे किले रो दूसरो विशाल दरवाजो हैं। बिरे बाद 60 डिग्री रो कोण बणतो तीसरो विशाल दरवाजो हैं। इ दो दरवाजो रे बीच रे भाग ने धूधस केविजे हैं।किले रो परकोटो दोहरो वणियोडो हैं।तीसरे परकोटो ने पार करने पर किले रो अन्तःभाग आ जावे हैं। किले रे 6 दरवाजा हैं । जिका सिराइ पोल , कचहरी पोल, सूरज पोल,घूषी पोल औंर राज पोल रे नाम सु जाणा जावे हैं। किले रे दक्षिण भाग मे एक मस्जिद हैं। इ मस्जिद ने शाँहजहा बणवाया था।

इतिहास
केन्द्रीय स्थल पर होणे कारण ई दुर्ग ने बार बार मुगलो रे आक्रमण रो शिकार होणो पडियो । महाराणा कुंभा भी दो बार नागौंर पर आक्रमण करियो। जिकामे बे सफ़ल हुया ।मारवाड रा शासक बख्त सिंह रे समय इ दुर्ग रो पुर्ननिर्माण करवायो गयो । ए किले री सुरक्षा व्यवस्था ने मजबूत करिया। मराठा भी इ दुर्ग ऊपर आक्रमण करियो। महाराणा विजय सिंह ने भी मराठो रे हमलो सु बचणे वास्ते कई महीनो तक दुर्ग मे रेवणो पडियो।ओ दुर्ग पांचाल नरेश द्रुपद रे आधिपत्य मे हो जिके ने अर्जुन जीतणे बाद द्रोणाचार्य ने सौंंप दियो हो।